एक बार रात को हम सैर पर निकल पडे,
उस सैर में हम जिंदगी से आगे चल पड़े /
रस्ते में हमें एक इंसान मिला,
सुंदर और जवान मिला //
हमने पूछा,
कौन हो तुम,
वो बोला-
तुम मुझे नही जानते ,
मैं ही लोगो की जिंदगी को रंगीन बनता हु,
बैठे-बैठे ही उन्हें दूर-दराज की सैर करता हु / /
मेरी वजह से ही
गरीबी और अमीरी के बीच की खाई दूर होती है ,
मेरी वजह से ही जिंदगी भरपूर होती ही,
मेरी वजह से ही गरीब आदमी सपने सजोता है ,
और भूखा रहने के बावजूद चैन से सोता है,
मेरी वजह से ही जिंदगी में रुबाब होता है /
असल में मेरा नाम ही ख्वाब होता है //
मैंने कहा-
तुम ही ख्वाब हो ,
जो आदमी को पागल बनता है ,
और गरीब आदमी को भी भरपेट खाना मिलने का झुटा सपना दिखलाता है /
ख्वाब बोला मैं झूठा ही सही,
पर तुम्हारी सच्चाई से तो अच्छा हु /
तुम्हारी सच्चाई-
गरीबो और अमीरों के बीच अन्तर बनती है ,
जबकि मैं गरीबो और अमीरों को जोड़ता हु ,
झूठे ख्वाब ही दिखलाता हु ,
पर गरीबो के चेहरे पर कुछ पल के लिए ही सही ,
हसी तो छोड़ता हु //
